हमारे समय का अनुपम आदमी : अनुपम मिश्र
“हमारे समय का अनुपम आदमी”- प्रभाष जोशी ने अनुपम मिश्र के बारे में यही कहा था। उनके निधन पर वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उनका एक व्यक्ति-चित्र खींचा था, .” सच्चे, सरल, सादे, विनम्र, हंसमुख, कोर-कोर मानवीय। इस ज़माने में भी बग़ैर मोबाइल, बग़ैर टीवी, बग़ैर वाहन वाले नागरिक। दो जोड़ी कुर्ते-पायजामे और झोले वाले इंसान। गांधी मार्ग के पथिक। 'गांधी मार्ग' के सम्पादक। पर्यावरण के चिंतक। 'राजस्थान की रजत बूँदें' और 'आज भी खरे हैं तालाब' जैसी बेजोड़ कृतियों के लेखक।" एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन के उद्गार से अनुपम मिश्र का उक्त चित्र पूरा बनता है, “ स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस दौर में वे चिट्ठी-पत्री और पुराने टेलीफोन के आदमी थे। लेकिन वे ठहरे या पीछे छूटे हुए नहीं थे। वे बड़ी तेज़ी से हो रहे बदलावों के भीतर जमे ठहरावों को हमसे बेहतर जानते थे।" सरल, सपाट, टायर से बनी चप्पल पहनने वाले अनुपम एकदम शांत स्वभाव के थे। उनका अपना कोई घर नहीं था। वह गाँधी शांति प्रतिष्ठान के परिसर में ही रहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बड़े भा...