Posts

Showing posts from December, 2020

भौगोलिक भारत के वास्तुकार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

आजाद भारत में मात्र 3 वर्ष 4 माह तक जीवित रहने वाले देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (31.10.1875 -15.12.1950) ने देश में फैली 565 रियासतों को अपनी कूटनीति और सूझबूझ के बलपर भारत में विलय कराया और भारत को भौगोलिक तथा राजनीतिक दृष्टि से एक इकाई बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया। लोग उनकी तुलना महान कूटनीतिज्ञ जर्मन चांसलर बिस्मार्क से करते हैं और उन्हें ‘लौहपुरुष’ कहकर उनके अपूर्व साहस और सूझबूझ की दाद देते हैं। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था। सरदार पटेल के पिता झबेरभाई एक धर्मपरायण व्यक्ति थे। वल्लभभाई की माता लाड़बाई भी अपने पति की तरह एक धर्मपरायण महिला थीं। वल्लभभाई पांच भाई थे और उनकी एक बहन थी। वे अपने माता पिता की चौथी सन्तान थे। 1893 में 16 साल की उम्र में उनका विवाह झावेरबा के साथ कर दिया गया था। किन्तु उन्होंने कभी अपने विवाह को अपनी पढ़ाई में बाधक नहीं बनने दिया। सन् 1908 में, पटेल जब सिर्फ 33 साल के थे, उनकी पत्नी का निधन हो गया। उस समय उनके एक पुत्र और एक पुत्री थी। इसके बाद उन्होंने विधुर का ज...

श्वेत क्रान्ति के जनक : वर्गीज कुरियन

श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन( 26.11.1921-9.9.2012) के उद्योग का ही फल है कि कभी दूध की कमी से जूझने वाला हमारा यह देश दुनिया के दुग्ध उत्पादक देशों में सबसे ऊंचे पायदान पर पहुँच गया है। इनके जन्मदिन 26 नवंबर को हम ‘नेशनल मिल्क डे’ के रूप में मनाते हैं। वे दुनिया में सबसे बड़े डेयरी विकास कार्यक्रम 'ऑपरेशन फ्लड' के वास्तुकार थे। डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को केरल के कोझिकोड में एक ईसाई परिवार में हुआ था। उनके पिता पुत्थेनपारक्कल कुरियन पेशे से डॉक्टर थे और उनकी माँ एक सुशिक्षित गृहिणी। उन्होंने चेन्नई के लोयला कॉलेज से 1940 में विज्ञान में स्नातक किया और चेन्नई के ही जी.सी. इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। जब वे 22 साल के थे तो उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनका परिवार उनके पिता के बड़े भाई के पास त्रिसूर चला गया। डिग्री पूरी करने के बाद कुछ समय तक उन्होंने जमशेदपुर स्थित टिस्को में नौकरी की, किन्तु इस दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी बीच उन्हें डेयरी इंजीनियरिंग में अध्ययन करने के लिए भारत सरकार की ओर से छात्रवृत्ति मिल गई और...

मार्क्सवादी ऋषि : आचार्य रामविलास शर्मा

कलकत्ता विश्वविद्यालय का भाषा विज्ञान विभाग देश का सबसे पुराना भाषा विज्ञान विभाग है। यहाँ सुनीति कुमार चाटुर्ज्या और सुकुमार सेन जैसे भाषा वैज्ञानिक अध्यापन कर चुके हैं। एक दिन मैने उस विभाग के एक प्रतिष्ठित और वरिष्ठ प्रोफेसर से पूछा कि क्या वे भाषाविज्ञान के क्षेत्र में रामविलास शर्मा के अवदानों से परिचित हैं ? तो उन्होंने उनके अवदानों से ही नहीं, उनके नाम से भी अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। मैं हतप्रभ था, सोचने लगा कि भाषाविज्ञान के क्षेत्र में रामलविलास शर्मा की स्थापनाएं इतनी महत्वपूर्ण हैं कि यदि उन्होंने अपनी किताबें अंग्रेजी में लिखी होतीं तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति के भाषा वैज्ञानिक के रूप में प्रतिष्ठा मिली होती और कलकत्ता विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग के पाठ्यक्रम में भी उन्हें जरूर शामिल किया गया होता. रामविलास शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य के गोल्डमेडलिस्ट थे, डॉक्टरेट थे और बलवंत राजपूत कॉलेज आगरा में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे किन्तु उन्होंने अपना सारा महत्वपूर्ण लेखन अपनी जातीय भाषा हिन्दी में किया। उन्होंने भाषाविज्ञान की किताबें हिन्दी में लिखकर यहा...

हिन्दूस्तानियत की मिशाल : मौलाना अबुल कलाम आजाद

"आज अगर आसमान से फ़रिश्ता भी उतर आए और दिल्ली के क़ुतुब मीनार की चोटी पर से ऐलान करे कि हिन्दुस्तान अगर हिन्दू-मुस्लिम एकता का ख्याल छोड़ दे तो वह चौबीस घंटों में आज़ाद हो सकता है, तो हिन्दू-मुस्लिम एकता के बजाय देश की आज़ादी को मैं छोड़ दूंगा-क्योंकि अगर आज़ादी आने में देर लग भी जाए तो इससे सिर्फ़ भारत का ही नुक़सान होगा, लेकिन हिन्दू-मुसलमानों के बीच एकता अगर न रहे तो इससे दुनिया की सारी इन्सानियत का नुक़सान होगा।" 1923 में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में मौलाना अबुल कलाम आजाद( 11.11.1888 – 22.2.1958) ने अपना अध्यक्षीय भाषण देते हुए उक्त बातें कहीं थीं। इसी तरह 1940 में लाहौर में हुए अधिवेशन में जब मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग रखी तो उस समय इस्लाम के इस विद्वान ने मोहम्मद अली जिन्ना के इस सिद्धांत को मानने से इंकार कर दिया कि हिन्दू और मुस्लिम दो अलग राष्ट्र हैं। उन्होंने सभी मुसलमानों से हिंदुस्तान में ही रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान की धरती पर इस्लाम को आए ग्यारह सदियां बीत गई हैं। और अगर हिन्दू धर्म यहाँ के लोगों का हज़ारों बरसों से धर्म रहा है तो इस्ला...

नर्मदा घाटी की अखण्ड आवाज : मेधा पाटकर

मेधा पाटकर (जन्म-01.12.1954) अपना 66वां जन्मदिन भी दिल्ली में देशभर से जुटे किसानों के साथ प्रदर्शन करते हुए मना रही हैं. कृषि कानूनों के विरोध में लंबे संघर्ष के लिए, तरह तरह की बाधाएं पार करते हुए वे भी किसानों तथा नर्मदा बचाओ आन्दोलन के अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली बार्डर पर डटी हैं. मेधा पाटकर को भी यहाँ पहुँचने में पांच दिन लग गए. उनका कहना है, “संविधान की रक्षा करना जरूरी हो गया है. मजदूर किसान सबके साथ अन्याय हो रहा है. केन्द्र सरकार ने सारा कुछ निजी हाथों में ले लिया है. बस अब खेती किसानी बची है और आम आदमी बचा है. इनका अस्तित्व भी खतरे में है.”(हिन्दुस्तान,27.11.2020) वैसे तो मेधा पाटकर हर दलित पीड़ित प्रताड़ित समुदाय के हक के लिए लड़ने को तत्पर रहती हैं किन्तु उनकी पहचान नर्मदा बचाओ आन्दोलन की अनथक योद्धा के रूप में है. ‘नर्मदा बचाओ आन्दोलन’ बाँध परियोजनाओं के खिलाफ संभवत: दुनिया का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला अहिंसक आन्दोलन है. सादा जीवन, सूती साड़ी और हवाई चप्पल पहनने वाली, गाँधीजी को अपना आदर्श और उनके द्वारा दिखाए गए संघर्ष के पथ पर अपनी एकनिष्ठ आस्था रखने वाली मेधा पाटक...

संविधान के अप्रतिम शिल्पी : बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर

भारत के पहले कानून व न्याय मंत्री, भारतीय संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष, असाधारण विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद, दार्शनिक, लेखक, पत्रकार, समाजशास्त्री, इतिहासविद्, मानवविज्ञानी, समाजसुधारक और दलित समाज के उद्धारक, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर( 14.4.1891-6.12.1956 ) का जन्म मध्य प्रदेश के महू नगर में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। वे अपने माता- पिता की चौदहवीं संतान थे। उनका परिवार कबीरपंथ को मानने वाला मराठी मूल का तथा हिन्दू महार जाति का था जिसे उस समय अछूत माना जाता था। भीमराव अंबेडकर के पिता ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में सूबेदार थे। सतारा के गवर्नमेंट हाई स्कूल से भीमराव की शिक्षा प्रारंभ हुई। किन्तु कुछ वर्ष बाद ही 1897 में भीमराव के माता पिता मुंबई आ गए। भीमराव जब लगभग 15 वर्ष के थे और पाँचवीं में पढ़ रहे थे तो 9 साल की लड़की रमाबाई से उनकी शादी हो गई। 1907 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष बंबई (मुंबई) विश्वविद्यालय से संबद्ध एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया। उस समय इस स्तर तक शिक्षा प...

न्यायपालिका में पवित्रता का संकल्प : प्रशान्त भूषण

सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के ही प्रधान न्यायाधीश पर पचास हजार की बाइक पर बैठने को लेकर तीखी टिप्पणी करना, सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व आधे प्रधान न्यायधीशों को भ्रष्ट कह देना, जजों पर आर्थिक पारदर्शिता न होने का लगातार आरोप लगाना और उसी के दबाव में जजों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्योरा घोषित करना क्या सामान्य साहस का काम है? सुप्रीम कोर्ट में ही वकालत करते हुए कांग्रेस हो या भाजपा, सबके घोटालों का पर्दाफाश करने के लिए लगातार जनहित याचिकाएं दायर करना और उनके लिए अपने खर्चे से लड़ते रहना क्या साधारण साहस का काम है? कचहरी के भीतर अपने चैंबर में ही गुंडों द्वारा बुरी तरह पीटे जाने के बाद भी सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करते रहना और जनहित के कार्यां से तनिक भी पीछे न हटना क्या साधारण साहस का काम है? अपनी वकालत का तीन चौथाई समय जनहित याचिकाओं की मुफ्त पैरवी में लगाना और पांच सौ से अधिक जनहित याचिकाओं की पैरवी का रिकार्ड कायम करना क्या साधारण साहस का काम है? हमारी न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और पवित्रता पर लगातार निगाह रखने के लिए सीपीआईएल, पीयूसीएल, सीजेए तथा सीजेएआर जैसे स...