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मेरे सपनों की पार्टी का घोषणा-पत्र ( पिछली लोकसभा चुनाव के ठीक पहले फेसबुक पोस्ट)

मेरे सपनों की पार्टी का घोषणा-पत्र यदि मेरे सपनों की पार्टी सत्ता में आई तो - 1. शिक्षा का ब्यापार पूरी तरह बंद किया जाएगा और सबके लिए समान, मुफ्त और मातृभाषाओं मे गुणवत्तायुक्त शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी. 2. “सादा जीवन- उच्च विचार” शिक्षा का मूल लक्ष्य होगा. शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उदात्त मानवीय मूल्यों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा. ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ की जगह मंत्रालय का नाम ‘शिक्षा मंत्रालय’ रखा जाएगा 3. सरकारी अस्पतालों को हर तरह की सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा तथा सबके लिए समान एवं उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जाएंगी. 4. हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाएगा. 5. जाति आधारित आरक्षण पूरी तरह से और हर स्तर पर खत्म किया जाएगा. 6. अपने- अपने नामों के साथ लगने वाले जाति सूचक शब्दों को हटाने वाले तथा अंतरजातीय विवाह करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाएगा. 7. धर्म और संप्रदाय को व्यक्तिगत आस्था के रूप में महत्व दिया जाएगा और धार्मिक कार्यों / आयोजनों को सरकारी सहायता से मुक्त रखा जाएगा. 8. कृषि कार्यों में कृषि-यंत्रों पर निर्भरता की जगह ...

जन्मदिन 1 अप्रैल 20 को फेसबुक पर स्वीकारोक्ति

हाई स्कूल के प्रमाण पत्र के अनुसार आज मेरा 66वाँ जन्मदिन है. वैसे मेरी जन्मपत्री के अनुसार जन्म दिन 17 सितंबर है. स्कूल में पंडीजी ने अपनी मर्जी से जो लिख दिया वही सर्वस्वीकृत है और उसे ही मैं भी मानता हूँ. भारत में मनुष्य की औसत आयु 65 वर्ष हो गई है. इस दृष्टि से मैंने अपेक्षित जीवन जी लिया है. आगे की जिन्दगी संसार की ओर से ‘घलुआ’ में मिल रही है. मुझे कब प्रस्थान करना पड़ेगा नहीं कह सकता, इसलिए इस जन्मदिन को अपने बारे में कुछ सफाई दे दूँ. पता नहीं, अगला जन्मदिन देखने को मिलेगा या नहीं. लगभग संतुष्ट हूँ, अबतक के जीवन से. गाँव में पला- बढ़ा. किसान का पुत्र. बड़े सपने देखने का शऊर ही नहीं था. किसी विश्वविद्यालय में अध्यापक बनना चाहता था और बन गया. अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहा. एक लेखक के रूप में अपनी जवाबदेही सिर्फ आम जनता के प्रति मानता हूँ और जो कुछ भी अबतक मैंने लिखा है, सब सोद्देश्य लिखा है. जांच-परख कर लिखा कि इससे आम जनता का कोई हित है या नहीं. मैं भौतिकवादी हूँ. ईश्वर, देवी-देवता, पुनर्जन्म, स्वर्ग- नरक आदि में मेरा विश्वास नहीं है. ब्रत-उपवास कभी नहीं किया. किन्तु सामाजिक व्यक...