जन्म दिन पर विशेष- हिन्दी के योद्धा : डॉ. राम मनोहर लोहिया ( अपना भारत में प्रकाश्य )
23 मार्च डॉ. राम मनोहर लोहिया का जन्म दिन है. संयोग से 23 मार्च भारत के अमर शहीद सरदार भगत सिंह की शहादत का भी दिन है. इन दोनों विभूतियों के सपने आज भी अधूरे हैं. राम मनोहर लोहिया ( 1910- 1967 ) आजाद भारत के अकेले राजनेता हैं जिन्होंने अपनी भाषा के मुद्दे पर राष्ट्रीय संदर्भ में विचार किया और आंदोलन भी चलाए, क्योंकि वे मानते थे कि बिना भाषा के लोकतंत्र गूंगा-बहरा है. लोहिया के भाषा संबंधी चिंतन में वर्णमाला से लेकर उसकी शिक्षा और शोध तथा भारतीय भाषाओं से उसका संबंध और उसपर अंग्रेजी का कहर आदि सबकुछ शामिल है. वे भाषा को देश की बहुत सारी समस्याओं के निदान की तरह देखते हैं. मस्तराम कपूर द्वारा संपादित ‘लोहिया रचनावली’ के एक खंड में उनके भाषा संबंधी चिंतन पर लगभग पाँच सौ पृष्ठ शामिल हैं. डॉ. लोहिया ने भाषा संबंधी जिन मुद्दों पर विचार किया है उनमें सामंती भाषा बनाम लोक भाषा, देशी भाषाएं बनाम अंग्रेजी, हिन्दी क्या है?, उर्दू जबान, अंग्रेजी हटाना- हिन्दी लादना नहीं तथा हिन्दी के सरलीकरण की नीति प्रमुख हैं. लोहिया जानते थे कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में अंग्रेजी का प्रयोग आम ज...