आलोचना में जनतंत्र के अन्वेषी : अशोक वाजपेयी
दुर्ग ( म.प्र.) में जन्मे, दिल्ली में पढ़े-लिखे, भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रहे अशोक वाजपेयी ( जन्म-16.01.1941 ) कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं किन्तु एक सुधी समीक्षक के रूप में भी उनकी पहचान है. वे हिन्दी के ऐसे विरल आलोचक हैं जिनकी समीक्षा-दृष्टि के दायरे में साहित्य के अलावा संगीत, चित्र, स्थापत्य आदि अन्य कलाएं भी शामिल हैं. संस्कृति का क्षेत्र भी इस दायरे में आ जाता है. वे आलोचना में एक ‘समावेशी परिसर’ बनाने की वकालत करने वाले आलोचक हैं. ‘फिलहाल’, ‘कुछ पूर्वग्रह’, ‘कविता का गल्प’, ‘कवि कह गया है’ आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं. इसके अतिरिक्त ‘मेरे साक्षात्कार’ में भी उनकी आलोचनात्मक मान्यताएं देखी जा सकती हैं. आधुनिक कवियों में अज्ञेय, मुक्तिबोध, रघुवीर सहाय, श्रीकान्त वर्मा, केदारनाथ सिंह, विजयदेवनारायण साही, कुँवरनारायण आदि के साहित्य की उन्होंने समीक्षाएं की हैं. अपने अन्य समकालीन कवियों- धूमिल, लीलाधर जगूड़ी, वेणु गोपाल, ऋतुराज, चंद्रकांत देवताले, प्रयाग शुक्ल, विष्णु खरे, सोमदत्त, राजेश जोशी, दूधनाथ सिंह, कुमार विमल, मणि मधुकर, राजकमल चौधरी, गंगाप्रसाद विमल, जगद...