जन्मदिन 1 अप्रैल 20 को फेसबुक पर स्वीकारोक्ति
हाई स्कूल के प्रमाण पत्र के अनुसार आज मेरा 66वाँ जन्मदिन है. वैसे मेरी जन्मपत्री के अनुसार जन्म दिन 17 सितंबर है. स्कूल में पंडीजी ने अपनी मर्जी से जो लिख दिया वही सर्वस्वीकृत है और उसे ही मैं भी मानता हूँ. भारत में मनुष्य की औसत आयु 65 वर्ष हो गई है. इस दृष्टि से मैंने अपेक्षित जीवन जी लिया है. आगे की जिन्दगी संसार की ओर से ‘घलुआ’ में मिल रही है. मुझे कब प्रस्थान करना पड़ेगा नहीं कह सकता, इसलिए इस जन्मदिन को अपने बारे में कुछ सफाई दे दूँ. पता नहीं, अगला जन्मदिन देखने को मिलेगा या नहीं.
लगभग संतुष्ट हूँ, अबतक के जीवन से. गाँव में पला- बढ़ा. किसान का पुत्र. बड़े सपने देखने का शऊर ही नहीं था. किसी विश्वविद्यालय में अध्यापक बनना चाहता था और बन गया. अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहा. एक लेखक के रूप में अपनी जवाबदेही सिर्फ आम जनता के प्रति मानता हूँ और जो कुछ भी अबतक मैंने लिखा है, सब सोद्देश्य लिखा है. जांच-परख कर लिखा कि इससे आम जनता का कोई हित है या नहीं.
मैं भौतिकवादी हूँ. ईश्वर, देवी-देवता, पुनर्जन्म, स्वर्ग- नरक आदि में मेरा विश्वास नहीं है. ब्रत-उपवास कभी नहीं किया. किन्तु सामाजिक व्यक्ति होने के कारण, सामाजिक दबाव में, कभी- कभी कर्मकाण्ड का सहभागी बनने का दिखावा करना पड़ा. यह अपनी कमजोरी मानता हूँ. मेरी अपनी मान्यता है कि मेरा अस्तित्व इसी संसार के नाते है और मेरा यह जीवन संसार का दिया हुआ एक उपहार है. मरने के बाद मेरे लिए सबकुछ खत्म हो जाएगा, धन और यश भी. यशस्वी का महत्व सिर्फ इसीलिए है कि उसकी बातें लोग ध्यान से सुनते हैं. इससे अधिक कुछ भी नहीं. यश भी तो धन की तरह एक भौतिक संपत्ति ही है. मरने के बाद किसी को भला क्या पता होगा कि संसार में उसका बड़ा यश है ? इसीलिए आत्मतुष्टि को और इस दुनिया को और भी अधिक सुन्दर बनाने में ही अपने लेखन की भूमिका मानता हूँ. कामना करता हूँ कि बाकी जीवन भी इसी जगत की बेहतरी में काम आएगा.
भिन्न-भिन्न तरीकों से जिन मित्रों ने मुझे शुभकामनाएं दी हैं, उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ.
जन्मदिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं सर । आपको पढ़ते,देखते और सुनते हुए मैं भी समृद्ध होता रहा हूँ । आपको पढ़कर एक समझ विकसित हुई है । अपनी निर्मिति में आप जैसी विभूतियों का अवदान मानता हूँ । सादर प्रणाम स्वीकारें सर ।
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