मेरे सपनों की पार्टी का घोषणा-पत्र
यदि मेरे सपनों की पार्टी सत्ता में आई तो -
1. शिक्षा का ब्यापार पूरी तरह बंद किया जाएगा और सबके लिए समान, मुफ्त और मातृभाषाओं मे गुणवत्तायुक्त शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी.
2. “सादा जीवन- उच्च विचार” शिक्षा का मूल लक्ष्य होगा. शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उदात्त मानवीय मूल्यों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा. ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ की जगह मंत्रालय का नाम ‘शिक्षा मंत्रालय’ रखा जाएगा
3. सरकारी अस्पतालों को हर तरह की सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा तथा सबके लिए समान एवं उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जाएंगी.
4. हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाएगा.
5. जाति आधारित आरक्षण पूरी तरह से और हर स्तर पर खत्म किया जाएगा.
6. अपने- अपने नामों के साथ लगने वाले जाति सूचक शब्दों को हटाने वाले तथा अंतरजातीय विवाह करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाएगा.
7. धर्म और संप्रदाय को व्यक्तिगत आस्था के रूप में महत्व दिया जाएगा और धार्मिक कार्यों / आयोजनों को सरकारी सहायता से मुक्त रखा जाएगा.
8. कृषि कार्यों में कृषि-यंत्रों पर निर्भरता की जगह शारीरिक श्रम के महत्व को प्रतिष्ठित किया जाएगा और किसानों को उनकी उपज की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिया जाएगा.
9. न्यूनतम और अधिकतम वेतन में पाँच गुने से अधिक का अंतर नहीं रखा जाएगा.
10. चुनाव प्रचार में सारा खर्च सरकार वहन करेगी. राजनीतिक दलों को मिलने वाले डोनेशन को सार्जनिक करने के लिए कानून बनेगा और उसका लेखा परीक्षण अनिवार्य होगा.
11. सभी स्तरों पर लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी.
नर्मदा घाटी की अखण्ड आवाज : मेधा पाटकर
मेधा पाटकर (जन्म-01.12.1954) अपना 66वां जन्मदिन भी दिल्ली में देशभर से जुटे किसानों के साथ प्रदर्शन करते हुए मना रही हैं. कृषि कानूनों के विरोध में लंबे संघर्ष के लिए, तरह तरह की बाधाएं पार करते हुए वे भी किसानों तथा नर्मदा बचाओ आन्दोलन के अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली बार्डर पर डटी हैं. मेधा पाटकर को भी यहाँ पहुँचने में पांच दिन लग गए. उनका कहना है, “संविधान की रक्षा करना जरूरी हो गया है. मजदूर किसान सबके साथ अन्याय हो रहा है. केन्द्र सरकार ने सारा कुछ निजी हाथों में ले लिया है. बस अब खेती किसानी बची है और आम आदमी बचा है. इनका अस्तित्व भी खतरे में है.”(हिन्दुस्तान,27.11.2020) वैसे तो मेधा पाटकर हर दलित पीड़ित प्रताड़ित समुदाय के हक के लिए लड़ने को तत्पर रहती हैं किन्तु उनकी पहचान नर्मदा बचाओ आन्दोलन की अनथक योद्धा के रूप में है. ‘नर्मदा बचाओ आन्दोलन’ बाँध परियोजनाओं के खिलाफ संभवत: दुनिया का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला अहिंसक आन्दोलन है. सादा जीवन, सूती साड़ी और हवाई चप्पल पहनने वाली, गाँधीजी को अपना आदर्श और उनके द्वारा दिखाए गए संघर्ष के पथ पर अपनी एकनिष्ठ आस्था रखने वाली मेधा पाटक...
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